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Sixwordstory 

बूढ़ी ज़िंदगी, गुणा भाग , जोड़ निभाती..

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जिंदगी में बहुत ऊँच नीच देखी
मैने हर साए में धूप देखी है ..
हाथों के लकीरी ज्ञान पर जिंदगी बिताने वालों
बिना बाजू वालों की भी तकदीरें बदलती देखी हैं……

कभी नीम सी , कभी निमोलियो सी – ये ज़िंदगी, कभी फूल सी, कभी काँटो सी – ये ज़िंदगी, कभी नमक सी, कभी मीठी सी- ये ज़िंदगी, चाहती रही ताउम्र एक शहद सी – ज़िंदगी!

Silence

कभी मौन की भाषा समझो , आँसू जो ठहर गए आँखों की कोर पे , लफ़्ज जो रुक गए होंठों के कोर पे , नज़रे जो टीकी हैं आसमां के छोर पे, पलकें जो टीकी हैं दरवाज़े के ओट पे, मौन जो ठहरा है आँखों के कोर पे, ओढ़नी जो लिपटी है उँगली के छोर पे, कान जो टीके हैं दूर के शोर पे, कितना बयां करते है ये कभी समझा है वो एक आँसू जो बहता नहीं पर तबाही मचाता है दुनिया के छोर पे

   
 

Bas Yun hi 

Time changes….with time, people too change……and with people, so many things change…feelings, emotions, relationships, attitudes.time changes your priorities , your attitude to life,your reactions to various situations, for good or bad but a hollow is definitely created, and make you realize the meaningless of small things! Bitter experience make you a little bit spiritual and good interactions create a void yearning to relive those days 

…but
memories stay….and…..well…… No end you start living in memories